Tuesday, November 6, 2012

आदित्य से सिर्फ दोस्ती का रिश्ता है

सुपरस्टार रानी मुखर्जी से रघुवेन्द्र सिंह ने फिल्मफेयर के लिए बातचीत की। उसे हम यहाँ प्रस्तुत कर रहे हैं।

स्वागत करने के लिए तैयार हो जाइए. रानी मुखर्जी फिर कमबैक करने जा रही हैं. जुहू में स्थित अपने भव्य बंगले कृष्णाराम से शायद सिनेमा के बड़े पर्दे पर! अब हमें बिना किसी पूर्वाग्रह के स्वीकार कर लेना चाहिए कि रानी जैसी मंझी और जिंदादिल अभिनेत्री कहीं नहीं जाने वाली हैं, क्योंकि निर्देशकों की एक ऐसी नई पीढ़ी खड़ी हो रही है, जो उन्हें देखते हुए बड़ी हुई है, उनके काम की दीवानी है और अब उन्हें लेकर ही अपनी कहानी गढ़ रही है. अइया के निर्देशक सचिन कुंडलकर और तलाश की निर्देशक रीमा कागती उसी नौजवान पीढ़ी का चेहरा हैं.
रानी अपने चाहने वालों के हाथों में खुद को सुपुर्द करने से हिचकिचाती नहीं हैं, क्योंकि वह जानती हैं कि वह उनका खयाल खुद से ज्यादा रखेंगे. प्रशंसक भले यह समझें कि उन पर रानी की नजर नहीं है, लेकिन रानी फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अपने प्रशंसकों की उपस्थिति से परिचित हैं. हालांकि उनका इन साइट्स पर कोई हैंडल नहीं है.
पिछले कुछ सालों से रानी मुखर्जी और आदित्य चोपड़ा का रिश्ता एक रहस्य बना हुआ है. रानी को यशराज फिल्म्स का बॉस तक कहा जाता है. हालिया यह सुनने में आया कि दोनों ने चुपचाप कुछ महीने पहले शादी कर ली. मगर क्या यह सच है? रानी यह सुनकर अपनी खिलखिलाती हंसी रोक नहीं पातीं. इस माहौल में उनके बंगले की छत पर लगी रातरानी फूल की खुश्बू एक अलग एहसास भर देती है. रानी मुखर्जी से हमारी बातचीत...

आप जैसी खुशमिजाज और मिलनसार शख्सियत ने पिछले कुछ सालों से लो-प्रोफाइल क्यों रखा है?  
मैंने लो-प्रोफाइल नहीं रखा है. यह लोगों का नजरिया है. एक्चुअली, आज सब सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हैैं, रोज उनके बारे में कुछ न कुछ खबर आती है. मैं शायद अभी भी ओल्ड फैशन टाइप हूं. चार-पांच साल पहले हम सिर्फ फिल्मों की रिलीज के दौरान इंटरव्यू करते थे, जब कुछ बहुत महत्वपूर्ण कहना होता था, तब इंटरव्यूज करते थे. शायद मैं वही पैटर्न आज भी फॉलो करती हूं. मैं फिल्म के बनने से रिलीज होने के पीरियड में उसकी मेकिंग में ज्यादा रुचि रखती हूं और उसमें व्यस्त रहती हूं. मैं ट्विटर, फेसबुक, ब्लॉग जैसी चीजों में ज्यादा लिप्त नहीं होती हूं. इस वजह से शायद लोगों को लगता है कि मैं लो-प्रोफाइल रखती हूं.

आपको टिवटर या फेसबुक जैसी नेटवर्किंग साइट्स पर आने की जरूरत महसूस नहीं होती? अब तो देश के प्रधानमंत्री भी टिवटर पर हैैं.
प्राइम मिनिस्टर का तो ट्विटर पर होना बहुत जरूरी है. वो कुछ बोलेंगे, तो महत्वपूर्ण बोलेंगे. मैं क्या बोलूूंगी महत्वपूर्ण? जिन लोगों को बात करना बहुत पसंद है या जिन्हें बहुत सारी चीजों का नॉलेज है, वह सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर रहना पसंद करते हैं. मैं अपने ग्रुप में खुश रहती हूं. मैं अपने घर में ज्यादा वक्त बिताती हूं.

आपके सब दोस्त जैसे करण जौहर बोलते नहीं है कि ट्विटर पर आओ?

हां, बोलते हैं, लेकिन जरूरी नहीं है कि दोस्त कुछ बोलें, तो उसे फॉलो करना चाहिए. कितने लोग कहते हैैं कि आप फिल्म की रिलीज के दौरान ट्विटर पर चले आइए, आपकी फिल्म का प्रचार बहुत अच्छे से होगा, लेकिन मेरा मानना है कि उस तरह आप एक सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम को मिस यूज कर रहे हैं.

लेकिन आमिर खान तो अपनी फिल्म के प्रचार के लिए ऐसा ही करते हैैं.
जैसा कि मैंने कहा कि सबका अपना अपना नजरिया है. कई एक्टर ऐसे भी हैैं, जिनके लिए लोग काम करते हैैं, जब वो बिजी होते हैं. उस समय उनका टिवटर एकाउंट कोई और हैंडल करता है. मेरे इर्द-गिर्द जितने कम लोग रहें, मुझे उतना अच्छा लगता है.

आपकी फिल्म का आज भी दर्शकों को इंतजार रहता है. इसका कारण क्या है?
हर एक्टर अपने फैंस की वजह से जिंदा रहता है और मुझे इस बात की खुशी है कि मेरे फैंस मुझे बहुत चाहते हैं. उनका जो इंतजार है, वह उनके प्यार की वजह से है. उनके प्रति मेरी जिम्मेदारी बहुत ज्यादा है, मैैं इसीलिए बहुत ध्यान से फिल्म साइन करती हूं. फैंस जिस तरह से मुझे प्यार करते हैैं, जिस तरह से मेरे लिए लड़ते हैं, उससे मुझे बहुत खुशी मिलती है. यह भी देखना आवश्यक है कि एक दर्शक के तौर पर मैैं वह फिल्म देखना चाहूंगी या नहीं. मेरे खयाल से हर साल दर्शकों का ट्रेंड बदलता रहता है, तो आपको उसे मद्देनजर रखते हुए भी फिल्म साइन करनी होती है. हर फेज चेंज होता है और उसका नॉलेज होना चाहिए. आपको डायरेक्टर या राइटर ऐसे चूज करने होते हैैं, जो उस वक्त, उस ट्रेंड के हिसाब से काम कर रहे हैैं.

आज कोई फिल्म रिलीज होती है, तो उस पर सौ करोड़ के मूवी क्लब में शामिल होने का प्रेशर रहता है. आपको लगता है कि अइया उस मुकाम को हासिल करेगी? 
आप शिर्डी जाइए और मेरे लिए प्रार्थना कीजिए, तो शायद आपका यह सवाल सच भी हो जाए (मुस्कुराती हैं). मैं इस बात में विश्वास करती हूं कि आप मन लगाकर काम करो, प्यार से फिल्म बनाओ और आगे की इतनी सोचो मत, क्योंकि जो होने या नहीं होने वाला है, उसे सोच-सोचकर हम वक्त नहीं बिताएं, तो बेहतर है. हम यह सोचकर फिल्म करते हैैं कि वह अच्छी बने, उसमें मास अपील हो, दर्शकों और क्रिटिक्स को पसंद आए. अब किस हद तक कोई फिल्म दर्शकों को पसंद आती है, दर्शक किस हद तक उसे प्यार करते हुए आगे ले जाते हैं, वह हमारे हाथ में नहीं है. यह भी डिपेंड करता है कि आपके स्टार्स कैसे हैैं.

आजकल अनेक अभिनेत्रियों का लक्ष्य केवल सौ करोड़ के मूवी क्लब में शामिल होना है. रोल की महत्ता उनके लिए मायने नहीं रखती. क्या आप ऐसी किसी फिल्म को हाथ लगाएंगी?
कोई आपके पास स्क्रिप्ट के साथ आकर यह नहीं कह सकता है कि यह फिल्म चलने वाली है.

साजिद खान तो दावे के साथ कहते हैैं!
अब तक शायद उन पर ईश्वर की कृपा है. लेकिन जहां तक मैंने देखा है कि कोई ऐसा इंसान नहीं है, जो आकर यह कहे कि आप यह फिल्म कीजिए, इसे करने से आपको अवॉर्ड मिलेगा या यह सौ करोड़ का बिजनेस करेगी. अगर ऐसा कोई इंसान जीवित होता, तो सब शायद उसी के पास जाते, मंदिर-मस्जिद जाना छोड़ देते. कम से कम फिल्म वाले तो उसके घर जाते और उससे पूछते कि भइया, मेरी स्क्रिप्ट जरा पढक़र बताइए कि मेरी फिल्म कितने करोड़ का धंधा करेगी? तो ही हम इस स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाएं. ऐसा तो कोई आदमी है नहीं. मैं समझती हूं कि ये सब बातें बहुत ही शैलो लेवल (घटिया बात) की हैैं. मेरा काम करने का तरीका थोड़ा सा कंटेंट ड्रिवेन होता है. बिना कंटेंट के मुझे नहीं लगता कि कुछ चल सकता है.

अइया में क्या कंटेंट होगा?
अइया में रोमांस और कहानी का कंटेंट मिलेगा, अच्छे गाने और नृत्य का कंटेंट मिलेगा, एंटरटेनमेंट मिलेगा. हम सपरिवार जिस तरीके की फिल्म जाकर देखना चाहते हैं, अइया वैसी फिल्म है.

अइया में आप एक इंसान की ओर उसकी सुगंध से आकर्षित होती हैैं. क्या आप रीयल लाइफ में भी ऐसा करेंगी?
जरूर. अगर आप मेरे पुराने इंटरव्यूज निकालें, तो उसमें आपको यह बात मिलेगी. पहले हमेशा एक सवाल पूछा जाता था कि आदमी की ओर आपको क्या चीज आकर्षित करती है, तो मैं बोलती थी कि सुगंध. एक आदमी की सुगंध बहुत अच्छी होनी चाहिए.

आपके कौन से को-स्टार में सबसे अच्छी स्मेल आती है?

शाहरुख खान. वो हमेशा बहुत अच्छे परफ्यूम लगा कर आते थे. मैं हमेशा उनके परफ्यूम के कलेक्शन चेक करती थी. उनसे पूछती थी कि आज आपने क्या लगाया है.

मीनाक्षी के किरदार के लिए किस चीज ने आपको आकर्षित किया?
मुझे सबसे दिलचस्प बात यह लगी कि मीनाक्षी सूर्या की ओर उसकी सुगंध की वजह से आकर्षित होती है. हिंदी फिल्म में ऐसा फ्लेवर अब तक नहीं देखा गया है. यह नॉवेल आइडिया लगा. अनुराग कश्यप ने डायरेक्टर सचिन कुंडलकर की बहुत तारीफ की. उन्होंने मुझे सचिन की एक फिल्म दिखाई थी, जिसमें मुझे सचिन का काम बहुत पसंद आया था. मैंने अनुराग से कहा था कि सचिन एक अच्छी कहानी लेकर मेरे पास आते हैं, तो मैैं जरूर उनकी फिल्म करूंगी. सचिन ने वैसा ही किया. वह बहुत अच्छी कहानी लेकर आए. और मैंने मराठी लडक़ी का रोल भी पहले नहीं किया था.

मीनाक्षी के किरदार को आपने कैसे आत्मसात किया? क्या प्रोसेज रहा?
सबसे पहले तो मुझे मीनाक्षी देशपांडे दिखना था. मीनाक्षी लगने के लिए मेरे लिए जरूरी था कि मैं मीनाक्षी की तरह बात करूं, क्योकि मीनाक्षी मेरी तरह बात नहीं करेगी. उसका बात करने का तरीका, हाव-भाव, चलने का ढंग अलग होगा. मीनाक्षी के कैरेक्टर में एक चीज दिलचस्प है कि वह रात में तो सपने देखती ही है, वह दिन में भी सपने देखती है. वह बैठे-बैठे ही अपने ख्वाब में निकल जाती है. वह मुझे दिलचस्प लगा. इसके लिए मैंने सचिन और उनके असोसिएट डायरेक्टर चिन्मय के साथ बहुत सारी रिडिंग्स की. मराठी लोग जिस तरह से हिंदी या अंग्रेजी शब्द का उच्चारण करते हैैं, वह बहुत ही अलग होता है. मैंने उस चीज पर काम किया. मैैं चाहती थी कि जब लोग ये फिल्म देखें, तो मीनाक्षी देशपांडे को पाएं. उसमें किसी की गर्लफ्रेंड, किसी की लवर, बहू, बेटी, बहन, भतीजी का फील आए. लोगों को लगे कि हमने ऐसी लडक़ी को अपने घर या पड़ोस में देखा हुआ है.

अइया के किरदार के लिए कॉस्ट्यूम तक की आपने खुद शॉपिंग की. क्या इन चीजों के लिए पांच-छह साल पहले भी आप वक्त दे पाती थीं?
मैं सात साल पहले भी ऐसा करती थी. जबसे मैंने साथिया पर काम करना शुरू किया, तबसे मेरा यही प्रोसेस रहा है. बंटी और बबली के कपड़े मैंने अक्की (नरूला) के साथ जाकर दुकानों से लिए थे.

इतनी मेहनत के बाद जब खबर आती है कि आपके मेकअप पर दस लाख रुपए खर्च हुए, तो आप कैसे रिएक्ट करती हैैं?
झूठ पर किस तरह का रिएक्शन हो सकता है. इस पर बात करके मैैं उस जर्नलिस्ट को ही महत्व दूंगी, जो इसके लायक नहीं हैैं.

पृथ्वीराज के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
बहुत अच्छा रहा. वो बहुत ही मंझे एक्टर हैं. वो बहुत ही को-ऑपरेटिव और इंटेलीजेंट एक्टर हैं. जब आप एक अच्छे एक्टर के साथ काम करें, तो आपका काम भी अच्छा हो जाता है. पृथ्वी ने बेटर शॉट देने में मेरी बहुत मदद की. इस फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट मराठी थिएटर एवं फिल्म से है, सब बुहत ही एक्सेप्शनल एक्टर हैं. उनके साथ काम करके मुझे बहुत आनंद आया. अगर लोग मेरा काम इस फिल्म में पसंद करेंगे, तो उसका क्रेडिट मैं इन सब कलाकारों को दूंगी. पृथ्वी कहते रहते थे कि वो मेरे बहुत पहले से फैन हैं, क्योंकि उन्होंने मेरी कुछ कुछ होता है तब देखी थी, जब वो एक्टिंग नहीं कर रहे थे.

क्या यह सच है कि आप पृथ्वीराज को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में सेटल होने में हेल्प कर रही हैं?
अच्छा? ये तो मुझे नहीं पता था. लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है. जैसे आज अगर आप मुझसे पृथ्वी के बारे में पूछेंगे, तो मैं उनके लिए अच्छा ही कहूंगी. आप कुछ लोगों के साथ काम करते हैं, जो आपको पसंद आते हैं, आप स्पार्क देखते हो लोगों में और आप बिना कुछ सोचे या बिना किसी कारण के उनकी तारीफ भी कर देते हो. अब सबका अपना-अपना नसीब है. कोई किसी को न तो बना सकता है और न कोई किसी की हेल्प करता है. कौन किस टाइम पर कहां पहुंच जाता है, सब नसीब में लिखा होता है. उसका क्रेडिट किसी को देना भी नहीं चाहिए.

सचिन कुंडलकर (अइया) और रीमा कागती (तलाश) के साथ आपने पहली बार काम किया. नए निर्देशकों के साथ काम करने का सबसे अच्छा पहलू क्या है?
दोनों मुझे बहुत प्यार करते हैं. जब एक आर्टिस्ट ऐसे डायरेक्टर के साथ काम करे, जो उसे बहुत पसंद करता है, तो एक अलग रैपो बनता है और काम करने का मजा अलग होता है. जैसे रीमा दस साल से मेरे पास आ रही हैं. वह चाहती हैं कि उनकी हर फिल्म मैं करूं. नए निर्देशकों ने आपकी सभी फिल्में देखी हैं, तो उनका अपनी फिल्म के लिए आपको देखने का नजरिया बिल्कुल अलग होता है. वो अपनी स्क्र्प्टि में आपको अलग तरीके से दिखाने का प्रयत्न करते हैं. ऐसे में आपका आधा काम आसान हो जाता है. मुझे नए डायरेक्टर्स के साथ काम करना वैसे भी बहुत पसंद है. रीमा और सचिन दोनों बहुत ही अच्छे निर्देशक हैं, अपने काम को पैशन के साथ करते हैं, मंझे निर्देशक हैं दोनों.

नए निर्देशकों में आप किसके साथ काम करना चाहेंगी?
मैं जोया के साथ काम करना चाहूंगी. जोया भी बहुत सालों से चाह रही हैं कि मैं उनके साथ काम करूं और मुझे उनका काम बहुत पसंद है. उनके साथ काम करके मेरा काम भी बहुत इंप्रूव होगा. इम्तियाज अली का काम मुझे बहुत पसंद है. विशाल भारद्वाज, अनुराग बासु, अनुराग कश्यप, मनीष शर्मा और अभिषेक चौबे का काम मुझे बहुत अच्छा लगा है. मुझे आदि (आदित्य चोपड़ा) के साथ एक एक्टर के तौर पर कभी काम करने का मौका नहीं मिला. अगर वो मुझे डायरेक्ट करें, तो मुझे बहुत अच्छा लगेगा.

आपने आठ महीने पहले आदित्य चोपड़ा से शादी कर ली. इसकी जानकारी जब आपको मिली, तब आपकी क्या प्रतिक्रिया थी?
किसने कहा? टैबलॉयड? जो लोग झूठ में विश्वास करते हैं, उनका क्या करें? झूठों की ही दुनिया है. यही प्रार्थना करती हूं कि जो लोग सच का साथ देेते हैं, वो इस दुनिया में रहें. ताकि लोगों तक सच जाए. मेरे खयाल से मेरी शादी को एक तरीके का मजाक बना कर रख दिया है, जो अच्छी बात नहीं है. लेकिन आप इंडस्ट्री में हैं और लोगों को आपके बारे में लिखने का हक है, तो लोग कुछ भी लिख देते हैं. उन्हें मना भी नहीं कर सकते.

सलमान खान के बाद आपकी शादी की चिंता सबको ज्यादा है. आप शादी करके इस चर्चा को खत्म क्यों नहीं कर देतीं?
मुझे ऐसी कोई जल्दी नहीं है और वैसे भी शादी जल्दबाजी में नहीं करनी चाहिए. जब मैंने कभी अलविदा ना कहना फिल्म की थी, तब मुझे यह सीख मिली थी कि शादी करो, तो सही रीजन्स के लिए करो. जब आप शादी करें, तो जरूरी है कि आप वह शादी निभाने के लिए करें. शादी को मजाक की तरह से नहीं देखें, तो बेहतर है.

शादी करने से आपको क्या चीज आपको रोक रही हैं? क्या अभी तक आपको सही इंसान नहीं मिला है?
ऐसी बात नहीं है. मैंने सुना है कि हम जोडिय़ों में नीचे आते हैं, बिछड़ जाते हैं और फिर शादी के दौरान मिलते हैं. तो जो इंसान मेरी जोड़ी में नीचे आया है, वह शादी के लिए मेरा जोड़ीदार बन ही जाएगा. तब तक मैं अपनी सिंगल लाइफ को काफी एंजॉय करुंगी. 

क्या आपको इस बात की जानकारी है कि आपकी पीठ पीछे इंडस्ट्री में लोग आपको यशराज का बॉस कहते हैं?
लोग मेरी पीठ पीछे क्या बात करते हैं, उससे न मुझे कोई लेना-देना है और न कोई लेना-देना होना चाहिए. मैं इस बात में विश्वास करती हूं कि आप अपनी लाइफ जीयो, अपना काम करो. भगवान आपको आपके काम की वजह से सफलता देगा या शायद आपको सफलता नहीं भी दे, तो उसमें कोई एक सीख छुपी होगी. लोगों का काम है कहना, लोग तो कुछ भी कहेंगे.

आदित्य चोपड़ा का नाम आपके साथ हमेशा जुड़ता है. उनके साथ आपके किस प्रकार के रिश्ते हैं?
प्रोड्यूसर तो वो मेरे रह चुके हैं. वो मेरे दोस्त हैं. उनसे दोस्ती का ही रिश्ता है.
   
खबर आई थी कि उन्होंने आपके जन्मदिन पर आपको डेढ़ करोड़ रुपए की कार गिफ्ट की.
वापस एक और झूठ. अब झूठ का क्या कर सकते हैं? लोगों का यही मानना है कि एक आदमी औरत को गिफ्ट देता है, औरत तो आदमी को गिफ्ट दे ही नहीं सकती है. ये जो नजरिया है लोगों का सोचने का, वह बहुत ही घटिया है. कभी-कभी दुख होता है कि लोग कैसी-कैसी बातें करते हैं.

आपने दस साल के बाद तलाश में करीना कपूर के साथ काम किया. उनके संग की सबसे खूबसूरत याद क्या है?
मुझसे दोस्ती करोगे की शूटिंग के दौरान मैंने और करीना ने बहुत अच्छे पल गुजारे थे. मैं और करीना अब तक उसे चेरिश करते हैं, क्योंकि वो पल शायद अभी न आएं, क्योंकि वो अलग पिक्चरें करती है और मैं अलग पिक्चरें करती हूं. करीना मुझे बहुत चाहती है और मैं भी उसको बहुत चाहती हूं. हम लंदन में शूटिंग कर रहे होते थे, तो हाइट पार्क वॉक के लिए जाते थे. खाना खाने साथ जाते थे. स्विटजरलैंड में जब हम साथ काम करते थे, तो वहां पर स्ट्रॉबेरीज और आइसक्रीम खाना मुझे याद है. ऐसी बहुत सारी यादें हैं. जैसे तब हम जब लोकेशन पर जाने के लिए एक बस में ट्रैवल करते थे. मुझे याद है कि जब हम लेक डिस्ट्रीक्ट शूटिंग करने गए थे, तो पूरी यूनिट एक बस में गई थी. बस में अंताक्षरी खेलना, वो बातें मुझे याद आती हैं. अब तो सब बदल गया है. अब आप आउटडोर में जाते हो, तो हर एक्टर के लिए एक अलग गाड़ी रहती है. सब अलग-अलग ट्रेवल करते हैं, लेकिन उस समय एक अलग चार्म था. आज भी जब मैं और बेबो मिलते हैं, तो बहुत प्यार से मिलते हैं. हममें एक चीज कॉमन है कि हम दोनों मुंहफट हैं, दोनों बोल देते हैं चीजें, दिल में कुछ नहीं रखते कुछ. मगर तलाश में हमारा साथ में कोई काम नहीं है. हमने अभी एक प्रोमोशनल वीडियो साथ में शूट किया.

लंबे समय के बाद आपने तलाश में आमिर खान के साथ काम किया. अब तक उनमें क्या चीज नहीं बदली है?
उनमें अपने काम को लेकर जो पैशन है, वह अब तक नहीं बदला है. वह वक्त के साथ बढ़ता ही गया है. उनका डेडिकेशन भी दोगुना हो गया है. सिर्फ वो अब ज्यादा सीरियस हो गए हैं. उनकी मस्ती कम हो गई है.

नई अभिनेत्रियों में किसने अपने काम से आपका दिल जीता है? क्या आप भी मानती हैं कि परिणीति चोपड़ा में आप जैसा स्पार्क है?
मुझे दीपिका का काम कॉकटेल में बहुत पसंद आया, परिणीति का इशकजादे में बहुत अच्छा लगा, अनुष्का शर्मा का काम बैंड बाजा बारात में बहुत अच्छा लगा. सोनाक्षी मुझे दबंग में बहुत अच्छी लगीं. कैटरीना मुझे न्यूयॉर्क में बहुत अच्छी लगीं. मुझे परिणीति और अनुष्का दोनों में यह चीज दिखती है कि वह दिल खोलकर, बहुत साफ दिल से और बहुत ही नैचुरल वे में एक्टिंग करती हैं.

अगर कल आप इंडस्ट्री छोडऩे का फैसला लेती हैं, तो आपके लिए दूसरा विकल्प क्या होगा?
मुझे नहीं लगता है कि कोई एक्टर यह तय कर सकता है कि मुझे अब काम नहीं करना है. दर्शक ही यह तय करते हैं कि मुझे इस एक्टर को देखना है और इस एक्टर को नहीं देखना है. कोई एक्टर इतना बड़ा नहीं है कि वह यह तय कर सके और मैं भी इतनी बड़ी नहीं हूं कि डिसाइड कर सकूं कि मुझे एक्टिंग नहीं करनी है. जिस दिन ऑडियंस मुझे नहीं देखना चाहेगी, उस दिन मैं अपने आप निकल जाऊंगी. जब तक मुझे ऑडियंस देखना चाहेगी, मैं काम करती रहूंगी.

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