Saturday, October 1, 2011

BIGG BOSS के घर का जायजा लेते संजय दत्त और सलमान खान (EXCLUSIVE)

Salman Khan and Sanjay Dutt taking their first step into the Bigg Boss House
Sanjay and Salman checking out the TV
Sanjay and Salman checking the TV for Cable only to find themselves on screen

                                Sanjay and Salman issue a Double Vaat warning!

 Sanjay and Salman share a light moment in the living room of the Bigg Boss House

Thursday, September 22, 2011

धर्मेन्द्र और हेमा की मोहक अदाएं








India's Got talent  शो के मंच पर धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी का मोहक और दिल जीत लेने वाला अन्दाज नज़र आया.  

Thursday, August 25, 2011

'The Dirty Picture' की पहली झलक

इम्तियाज अली की नई फिल्म ROCKSTAR का पहला लुक

इम्तियाज अली की अगली फिल्म ROCKSTAR का पहला लुक. रणबीर कपूर इस फिल्म में केन्द्रीय भूमिका निभा रहे हैं. उनके साथ इसमें नई अभिनेत्री नर्गिस फाकरी आ रही हैं. ए आर रहमान ने फिल्म का संगीत तैयार किया है.
११ नवम्बर को प्रदर्शित होने जा रही यह फिल्म इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि  यह स्वर्गीय शम्मी कपूर की आखिरी फिल्म है.
-रघुवेंद्र सिंह

Wednesday, July 27, 2011

वीना मलिक की दाल में कुछ काला है

दाल में कुछ काला है फिल्म से वीना मलिक फिल्मों में अपने अभिनय करियर का श्रीगणेश करने जा रही हैं. वीना इसमें डबल रोल प्ले कर रही हैं. पाकिस्तान की लोकप्रिय  कमेडियन  जोडी  अली हसन और इरफान मलिक भी इसमें अभिनय कर रहे हैं.  आनन्द बलराज फिल्म क निर्देशन कर रहे हैं. मुम्बई में फिल्म के मुहुर्त से वीना मलिक की कुछ तस्वीरें.....


      

Thursday, July 7, 2011

कैंसर ने ली रासिका जोशी की जान

मुम्बई, ८ जुलाई. मराठी, हिन्दी फिल्मों एवं छोटे परदे पर अपने प्रभावी अभिनय से कई किरदारों को यादगार करने वाली  अभिनेत्री रासिका जोशी का बीती रात निधन हो गया. वे पिछले नौ वर्षों से कैंसर से लड़ रही थी.  डरना ज़रुरी है, एक् हसीना थी, वास्तु शास्त्र, गायब, भुल-भुलैया, मालामाल वीकली उनकी यादगार फिल्में हैं. एकता कपूर के सीरियल बंदिनी में उनका तरु फुइ का किरदार बेहद लोकप्रिय हुआ था.वे मराठी रंगमंच और सिनेमा से जुडी रही. मराठी रंगमंच में उन्हें कई पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. अक्स की ओर से इस प्रतिभाशाली अभिनेत्री को श्रधांजलि.

Thursday, June 30, 2011

'लॉन्च' शब्द से नफरत है-तनुज विरवानी

तनुज विरवानी अभिनेत्री रति अग्निहोत्री के बेटे हैं। चौबीस साल के तनुज की ख्वाहिश है कि लोग एक दिन उनकी मां को उनके नाम से जानें। उनकी पहली फिल्म लव यू सोनियो जल्द ही रिलीज होगी। तनुज से मुलाकात।

पीछे रहना चाहता था : मुंबई में पला-बढ़ा मैं कैमरे के सामने आने से डरता था। मुझे बीच-पच्चीस लोगों के बीच अपनी बात रखने में शर्म महसूस होती थी। मैंने फैसला किया कि कैमरे के पीछे ही रहूंगा। मैंने पांच शॉर्ट फिल्में डायरेक्ट कीं, जिनमें से कुछ फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई। मैंने कैमरे के पीछे करियर बनाने का फैसला किया था। एक्टिंग के बारे में कभी नहीं सोचा था, लेकिन दो-ढ़ाई साल पहले मैंने मन बनाया कि एक्टिंग में ही करियर बनाऊंगा। मैंने किशोर नमित कपूर के एक्टिंग स्कूल में दाखिला लिया।
ऐक्टर मेरे अंदर था : पहली फिल्म लव यू सोनियो की शूटिंग आरंभ करने से पहले मैंने चांस पे डांस फिल्म और आफताब शिवदासानी की फिल्म आओ विश करें में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। देखें तो, हम सबके अंदर एक ऐक्टर है। हम रोजमर्रा के जीवन में कई रोल निभाते हैं। मेरी तो मां ऐक्ट्रेस हैं। मुझे एक न एक दिन कैमरे के सामने आना ही था। मेरे अंदर एक निर्देशक भी मौजूद है। मैं एक दिन फिल्म डायरेक्ट करूंगा। मैंने मुंबई के स्कॉटिश स्कूल और एच आर कॉलेज में पढ़ाई की है।
कुछ थोपती नहीं हैं मम्मी : मैंने मम्मी के प्रोफेशन को जरूर अपना प्रोफेशन बनाया है, लेकिन मैं उनसे किसी भी तरह की मदद की अपेक्षा नहीं करता। मैं जब मम्मी से सुझाव मांगता हूं, तभी वे मेरी मदद करती हैं। वे जबरदस्ती अपना ज्ञान मुझ पर नहीं थोपतीं। मम्मी स्पॉट लाइट के बाहर मेरी मदद करती हैं। मैं चाहता भी नहीं हूं कि वे किसी से मेरी सिफारिश करें। लोग जान गए हैं कि मैं उनका बेटा हूं। अब मुझे खुद की पहचान बनानी है। मैं नहीं चाहता हूं कि लोग मुझे मम्मी के बेटे के रूप में जानें। मैं उनके नाम को अपने दम पर रोशन करना चाहता हूं।
लव यू सोनियो : मेरी पहली फिल्म लव यू सोनियो के निर्देशक जोय रंजन और मधुर भंडारकर मित्र हैं। जोय को मेरा नाम मधुर भंडारकर ने रिकमेंड किया था। मैं जोय से मिला और स्क्रिप्ट सुनी। फिल्म रोमांटिक कॉमेडी है। इसमें मेरा कैरेक्टर कैथलिक ब्वॉय मार्क का है, जो कॉलेज में पढ़ता है। वह नटखट है। इस फिल्म में इमोशन, ऐक्शन, डांस, रोमांस, ड्रीम सीक्वेंस सब कुछ है। मैंने तुरंत फैसला किया कि यही मेरी पहली फिल्म होगी। मुझे अपने प्रोफेशन में लॉन्च शब्द से नफरत है। लोग मुझसे पूछते हैं कि तुम कब लॉन्च हो रहे हो? तो मैं कहता हूं कि मैं कोई मिसाइल हूं क्या, जो मुझे लॉन्च किया जाएगा। यह कहो कि मेरी पहली फिल्म कब आ रही है।
बदलाव का दौर : लव यू सोनियो में मेरे अपोजिट 2010 की मिस इंडिया नेहा हिंगे हैं। फिल्म की सत्तर प्रतिशत शूटिंग हो गई है। सितंबर में यह रिलीज होगी, ऐसी आशा है। मैं उस पल का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं। मेरा लक्ष्य ज्यादा फिल्में करना नहीं, बल्कि कम लेकिन अच्छी फिल्मों का हिस्सा बनना है। सिनेमा में अभी बदलाव का दौर है।
-रघुवेंद्र सिंह 

सीक्वल क्वीन हो गई हूं-जैक्लीन फर्नांडीज

बिपाशा बसु और मल्लिका सहरावत के बाद अब जैक्लीन फर्नांडीज हिंदी फिल्मों की नई सेक्स सिंबल बनने के लिए तैयार हैं। मर्डर 2 की झलकियों में मिस श्रीलंका जैक्लीन का बोल्ड और सेक्सी अंदाज देखकर यह तय माना जा रहा है। पिछले दिनों जैक्लीन से महेश भट्ट के दफ्तर में मुलाकात हुई। 

जाने कहां से आई है के बाद प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में क्या बदलाव हुए हैं?
मेरा आउटलुक और एटीट्यूड चेंज हुआ है। मैंने महसूस किया कि इस इंडस्ट्री में बदलना बहुत जरूरी है। यहां कॉम्पिटिशन बहुत है। लोगों की पसंद-नापसंद तेजी से बदल रही है। अगर आप समय के हिसाब से खुद को इंप्रूव नहीं करेंगे, नई चीजें नहीं करेंगे, तो लोग आपको भूल जाएंगे। आपकी जगह कोई और ले लेगा। 2007 में मैंने अलादीन और जाने कहां से आई है साइन की थी। उसके बाद मेरे पास कुछ एक्साइटिंग ऑफर नहीं आए। मर्डर 2 का ऑफर आया, तो लगा कि ऐसा काम मैंने नहीं किया है। लगा कि इसमें मैं परफॉमर्ेंस दिखा सकती हूं। अपनी रेंज दिखा सकती हूं। जाने कहां से आई है के पहले मैं बहुत सेफ चल रही थी।
इस दौरान क्या आपने अपने आसपास के लोगों की भी छंटनी की?
जब मैं इंडिया आई थी, तब मेरे फ्रेंड्स मेरे काम से संबंधित नहीं थे। बिजनेस के लोग थे। कोई रेस्टोरेंट मालिक था तो कोई किसी ऑफिस में काम करता था। जब मैं फिल्मों में आई, तो नए फ्रेंड्स बने, जो फिल्मों से बनते हैं लेकिन वह प्रोफेशनल लाइफ होती है। आपको पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच एक लाइन खींचकर रखनी पड़ती है।
मर्डर 2 साइन करने से पहले क्या आपने मर्डर देखी थी या उसके बारे में सुना था?
जब मैं इंडिया आई, तो कुछ ऐसी फिल्में थीं जिनके बारे में मैंने बहुत सुना था। जैसे शोले और देवदास। हाल की फिल्मों में एक फिल्म मर्डर थी। मैंने उस फिल्म की डीवीडी खरीदी और देखी। वह फिल्म मुझे बहुत स्टाइलिश, हार्ड हिटिंग लगी। उसमें मल्लिका का परफॉमर्ेंस बहुत अच्छा लगा।
मर्डर 2 का ऑफर आया, तो आपकी प्रतिक्त्रिया क्या थी?
मुझे बिलीव नहीं हुआ। मैं भट्ट साहब के ऑफिस गई थी। वे मुझसे पूछ रहे थे कि आपके पास क्या डेट उपलब्ध है? मैं उन्हें अपनी डेट्स के बारे बता रही थी कि मुझे खयाल आया कि वे क्यों पूछ रहे हैं। मैंने पूछा कि आप किस लिए पूछ रहे हैं? उन्होंने कहा कि मर्डर 2 फिल्म के लिए पूछ रहा हूं। वे कॉन्फिडेंट थे कि मैं हां कहूंगी। उन्होंने मुझे नैरेशन दिया। मैं जानती थी कि मर्डर एक ब्रांड है।
इसमें आपकी क्या भूमिका है?
मेरा कैरेक्टर एक मॉडल का है, जो गोवा में रहती है। मॉडलिंग उसका पेशा है, लेकिन कहानी उसकी और इमरान के रिलेशनशिप की है। इमरान का कनेक्शन एक मर्डर से है। इसमें एक मर्डरर की तलाश हो रही है। ब्वॉयफ्रेंड की वजह से मैं यानी प्रिया भी इसमें इंवाल्व हो जाती है।
आपके पिछले किरदारों जैसमीन और तारा से प्रिया कितनी अलग है?
जैसमीन और तारा के लिए मुझे एक्टिंग करनी पड़ी थी। इसमें मेरा कैरेक्टर बहुत रीयल है। प्रिया बिल्कुल मेरी तरह है। बबली गर्ल की। भट्ट कैंप की फिल्मों में एक खास बात होती है कि इसमें आपको परफॉर्म तो करना पड़ता है, लेकिन साथ ही रीयल भी रहना पड़ता है।
मर्डर का नाम लेते ही मन में एक बोल्ड और सेक्सी गर्ल की तस्वीर उभर आती है। प्रिया इस मामले में कैसी है?
मर्डर की कहानी ऐसी महिला की थी, जो हसबैंड को चीट करती है। उसमें मल्लिका के कैरेक्टर को बोल्ड होना था। मल्लिका ने उसमें बहुत अच्छा काम किया। अगर मर्डर मल्लिका में सेंट्रल फोकस थीं, तो मर्डर 2 में विलेन सेंट्रल फोकस है, लेकिन विलेन इमरान नहीं हैं। इसमें बोल्ड सीन जरूरी नहीं है।
इमरान हाशमी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
इमरान से मेरी पहली मुलाकात मर्डर 2 के फोटो शूट के दौरान हुई। वे बहुत शांत थे। मुझे बहुत फिक्त्र होने लगी कि फिल्म की शूटिंग कैसे होगी क्योंकि रितेश, मिलाप और सुजॉय के साथ मैंने बहुत मस्ती की थी। मोहित सूरी भी बहुत शांत हैं। दोनों ऑब्जर्व ज्यादा करते हैं लेकिन जब हम शूटिंग के लिए गोवा गए, तो वहां इमरान बदल गए। वे बहुत फनी हैं। वे मोहित की खिंचाई करते थे।
हाउसफुल 2 में आप हैं। यह कब शुरू होगी?
उसकी शूटिंग शुरू हो गई है। भट्ट कैंप के साथ मेरी अगली फिल्म राज 3 है। मेरे पास एक और सीक्वल फिल्म का ऑफर आया है। कहा जा सकता है कि मैं सीक्वल क्वीन हो गई हूं।
-रघुवेंद्र सिंह 
जैकलिन

Sunday, June 12, 2011

लगान विशेष (15 जून 2001 )

भारतीय सिनेमा के इतिहास में 15 जून 2001 को 'लगान' के रूप में एक अविस्मरणीय अध्याय जुड़ा। प्रदर्शन के दस वर्ष पूरे कर रही 21वीं सदी की इस पहली क्लासिक फिल्म के सृजन के सफर पर विशेष रिपोर्ट..

आमिर खान 
बढ़ी प्रयोग की हिम्मत
बतौर एक्टर मैं अपनी हर फिल्म को सौ फीसदी अहमियत देता हूं। इसके बावजूद लगान मेरे लिए खास और अहम फिल्म है। यह मेरे होम प्रोडक्शन की पहली फिल्म है। मैंने पिता और चाचा को करीब से देखा था। फिल्म निर्माण के नुकसान से परिवार की मुश्किलों को मैं समझता था। मैंने तय कर रखा था कि मुझे कभी निर्माता नहीं बनना है। अपने पुराने इंटरव्यू में मैंने साफ कहा था कि मैं कभी निर्माता नहीं बनूंगा, लेकिन लगान की स्क्रिप्ट ने मुझे निर्माता बनने पर विवश कर दिया।
आशुतोष गोवारीकर ने मुझे एक्टर के तौर पर यह कहानी सुनाई थी। मुझे स्क्रिप्ट बहुत पसंद आई। मैंने आशु को सलाह दी कि तू मेरा नाम लिए बगैर निर्माताओं को स्क्रिप्ट सुना। अगर किसी को स्क्रिप्ट पसंद आए तो ही बताना कि इसमें आमिर है। फिल्म इंडस्ट्री के माइंडसेट को मैं अच्छी तरह समझता था। आशुतोष का कॅरियर दो फ्लाप फिल्मों का था। मुझे भी डर था कि निर्माता उस पर बेवजह दबाव डाल सकते हैं। मुझे स्क्रिप्ट इतनी पसंद थी कि मैं उसमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं चाहता था। प्रोड्यूसर न मिलने पर मैंने उसकी भूमिका निभा ली।
लगान के लिए हां कहने में पुरानी पीढ़ी के हिम्मती निर्माता-निर्देशकों से प्रेरणा मिली। बिमल राय, महबूब खान, राज कपूर सभी ने अपने समय में जोखिम लिया और अपने दिल की फिल्म पैशन के साथ बनाई। आज हम उन सभी फिल्मों पर गर्व करते हैं। मुझे लगा कि दिल को फॉलो करना सही होगा। इंडस्ट्री में मुझे दस साल हो चुके थे। मेरा मन कह रहा था कि मुझे कुछ तो करना चाहिए। हिट और फ्लाप की परवाह किए बगैर मैंने खुद को झोंक दिया। वह अनुभव बहुत इमोशनल रहा। उन दिनों जो भी सुनता था, वह इसे बंद करने की सलाह देता था। यहां तक कि आदित्य चोपड़ा और करण जौहर ने भी इसे न करने की सलाह दी, लेकिन मेरा और आशुतोष का इस पर विश्वास था।
लगान ने विश्वास दिया कि हम प्रयोग कर सकते हैं। उसकी कामयाबी ने बाद में इंडस्ट्री के लोगों को प्रेरित किया कि वे दिमाग की खिड़कियां खोलकर अलग किस्म की फिल्में बनाएं। लगान ने युवा फिल्मकारों को निर्भीक होने की राह दिखाई। मैं हमेशा अलग किस्म की फिल्में करता रहा था, फिर भी मैं कहूंगा कि मेरे निर्भीक प्रयासों पर लगान ने कामयाबी की मुहर लगा दी।
पहली फिल्म कयामत से कयामत तक की कामयाबी के बाद मैंने नौ फिल्में साइन की थीं। उन फिल्मों को करते हुए मैंने डायरेक्टर और स्क्रिप्ट की अहमियत समझ ली थी। मेरी समझ में आ गया कि स्क्रिप्ट से भी अधिक जरूरी डायरेक्टर है। मैं डायरेक्टर, स्क्रिप्ट और प्रोड्यूसर को जांचने के बाद ही फिल्म के लिए हां कहता हूं। लगान का प्रोड्यूसर बनने के बाद से मेरे होम प्रोडक्शन की फिल्में देख लें.. मैं जोखिम और कामयाबी के साथ आगे बढ़ रहा हूं। लगान ने मेरे इरादों को बुलंदी दी। कई लोगों को लग सकता है कि लगान मेरे कॅरियर का टर्निग पाइंट है। मैं उनसे सहमत होने के साथ कहूंगा कि ये लक्षण मुझमें पहले से थे, हां, उसने मेरे निजी प्रयासों को स्वीकृति दिला दी। उसके बाद से केवल मंगल पांडे को ही मिक्स रेस्पांस मिला।
लगान के सबक के तौर पर कुछ प्वाइंट बताने हों तो मैं कहूंगा कि उसके बाद ही इंडस्ट्री की समझ में आया कि एक ही शेडयूल में फिल्म पूरी करने के क्या फायदे हैं? स्क्रिप्ट भी पहले पूरी कर ली गई थी। बाउंड स्क्रिप्ट उसके बाद ही फैशन में आई। हम अमेरिका से अपूर्व लाखिया को लेकर आए। एक कॉल शीट बनती थी और उस पर मेरे सहित सभी को अमल करना होता था। कई लोग कहते हैं और इंडस्ट्री भी मानती है कि लगान के बाद फिल्म मेकिंग का तरीका बदल गया। मैं तो कहूंगा कि अच्छा ही हुआ। लगान ने फिल्म इंडस्ट्री को दिशा दी। नई सोच के फिल्मकारों को हिम्मत दी। आज उसकी वजह से युवा फिल्मकार प्रयोग कर पा रहे हैं। मैं हैरान होता हूं कि लगान के बाद कोई और फिल्म उस स्तर को क्यों नहीं छू सकी? यकीन करें लगान को दोहरा पाना या उसके सिक्वेल या रीमेक के बारे में सोच पाना भी असंभव है!
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ऐसी लागी लगन
* आशुतोष गोवारीकर ने लगान की कहानी मित्र आमिर खान को सुनाई। कोई निर्माता इसमें पैसा लगाने को तैयार नहीं था। इसी फिल्म के साथ आमिर खान की निर्माता न बनने की सौगंध टूट गई।
* लगान के संवाद अवधी में रखने का सुझाव साहित्यकार केपी सक्सेना का था, जिनका चुनाव आशुतोष गोवारीकर ने संवाद लेखन के लिए किया था। आमिर खान इस बोली में पारंगत नहीं थे। आमिर ने योजना बनाई कि लगान की शूटिंग आरंभ होने से तीन माह पूर्व वे उत्तर प्रदेश के किसी अवधी भाषी क्षेत्र में रहेंगे, लेकिन निर्माता की जिम्मेदारियों से उन्हें फुरसत नहीं मिली। बाद में जावेद अख्तर के सुझाव पर आमिर खान ने लखनऊ के अभिनेता लेखक राजा अवस्थी को अवधी सिखाने के लिए भुज बुलाया।
* लगान की नायिका गौरी की भूमिका के लिए नम्रता शिरोडकर, अमीषा पटेल, नंदिता दास सहित कई अभिनेत्रियों का ऑडिशन हुआ, लेकिन अंत में इस भूमिका के लिए नई अभिनेत्री ग्रेसी सिंह का चुनाव किया गया।
* कच्छ में स्थानीय लोगों की सहायता से लगान के चंपानेर गांव का सेट बनाया जा सका। शूटिंग खत्म होने के बाद गांव वालों को जमीन लौटाने के लिए लगान के काल्पनिक गांव चंपानेर को ध्वस्त किया गया।
* आमिर खान चाहते थे कि उन्नीसवीं सदी की लगान का भुवन मूंछें रखे, लेकिन आशुतोष इसके पक्ष में नहीं थे।
* लगान में आमिर खान ने एक नई कार्य संस्कृति अपनाई। उन्होंने छह माह के लंबे शेड्यूल में फिल्म की शूटिंग खत्म करने की योजना बनाई। फ‌र्स्ट एडी और सिंक साउंड का इस्तेमाल किया। चार सौ लोगों की यूनिट साढ़े चार माह भुज में डेरा डाले रही। लगान का शूटिंग शेड्यूल 13 मई को खत्म होना था, लेकिन आखिरी शॉट 17 जून 2000 को शाम के पांच बजे लिया गया।
* आशुतोष गोवारीकर ने लगान का बजट नौ करोड़ रुपए आंका था, जो शूटिंग आरंभ होते-होते सोलह करोड़ रुपए और शूटिंग खत्म होते-होते बीस करोड़ रुपए से भी अधिक हो गया।
* आमिर लगान को साढ़े तीन घंटे से भी छोटा करना चाहते थे, पर आशुतोष ने उन्हें लगान को तीन घंटे बयालीस मिनट लंबी बनाने के लिए सहमत कर लिया।
* लगान के क्रिकेट-दृश्यों के लिए 27 फरवरी 2001 को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुए भारत-आस्ट्रेलिया के मैच में भीड़ की तालियों और खुशियों को रिकॉर्ड किया गया था। इस शोर को रिकॉर्ड करने की अनुमति मिलना आसान काम नहीं था। आमिर ने सचिन तेंदुलकर के साथ अपनी दोस्ती का उपयोग किया।
* लगान की पहली स्क्रीनिंग रिलीज से पांच दिन पहले भुज के एक साधारण सिनेमाघर में हुई। चार सौ की क्षमता वाले सिनेमा घर में स्क्रीनिंग के दौरान दोगुनी संख्या में लंदन, मुंबई और कच्छ के लोग भीषण गर्मी के बावजूद उपस्थित थे।
* ढाई साल के लेखन, एक साल के प्री प्रोडक्शन, छह महीनों की शूटिंग और एक साल के पोस्ट प्रोडक्शन के बाद भारत के दो सौ साठ सिनेमाघरों में लगान प्रदर्शित हुई।
* रिलीज के दस सप्ताह बाद तक लगान के टिकट उपलब्ध नहीं थे। वितरक और प्रोडक्शन ऑफिस से मांग थम नहीं रही थी। आमिर दोस्तों के लिए भी टिकट नहीं जुटा पाए थे।
* इंदौर के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्ट्डीज में केस स्टडी के रूप में लगान शामिल हुई। कंपनियों ने आमिर खान और आशुतोष गोवारीकर को टीम गठन पर विचार रखने के लिए आमंत्रित किया।
* मदर इंडिया और सलाम बांबे (1988) के बाद लगान तीसरी भारतीय फिल्म है, जिसे ऑस्कर अवार्ड के लिए नामांकित किया गया। 12 फरवरी 2002 में लगान को सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म वर्ग में नामांकित किया गया।
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बदलाव की बयार
लगान सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा जगत के बदलाव की प्रतीक है। आज यह न सिर्फ सिनेमा के अध्येताओं, बल्कि बिजनेस स्कूल के अभ्यर्थियों के लिए भी शोध का विषय है।
टूट गए सारे नियम
भारतीय सिनेमा का प्रयोगशील आंदोलन जिस इमारत पर खड़ा है उसकी नींव लगान ने रखी थी। लगान ऑफबीट फिल्मों और कामर्शियल फिल्मों की पहली कड़ी बनी। लगान की मेकिंग से करीब से जुड़े और द स्पिरिट ऑफ लगान के लेखक सत्यजित भटकल कहते हैं, ''आज युवा निर्देशकों को फिल्म के विषय के चुनाव में जो आजादी मिल रही है, उसकी लड़ाई आमिर और आशुतोष ने लगान के जरिए लड़ी थी। उन दिनों यही माना जाता था कि अपारंपरिक और अलग फिल्म बनानी है तो वह आर्ट फिल्म होगी। यह स्पष्ट था कि आप अलग विषय पर मेनस्ट्रीम फिल्म नहीं बना सकते। लगान ने यह लड़ाई लड़ी और जीती। उसके बाद दर्शकों ने भी मुहर लगा दी कि कोई फार्मूला नहीं चलता। लगान ने पुराने सारे नियम तोड़ दिए। वह टर्निग प्वाइंट साबित हुई।''
दिखी दोस्ती की बानगी
लगान आमिर खान और आशुतोष गोवारीकर की दोस्ती, परस्पर सम्मान, सहयोग और विश्वास की बुनियाद पर बनी थी। आमिर ने अपने पुराने मित्र आशुतोष की रचनात्मकता पर विश्वास नहीं किया होता, तो शायद लगान कभी नहीं बन पाती। यदि आशुतोष का आमिर से तादात्म्य नहीं हो पाता, तो भी लगान जैसी कालजयी फिल्म का निर्माण मुश्किल था। लगान आमिर और आशुतोष की दोस्ती के मधुर रिश्ते की बानगी है। लगान के सफर ने आमिर और आशुतोष के व्यक्तित्व का भी कायाकल्प किया। लगान की मेकिंग में आमिर और आशुतोष के सफर के साक्षी रहे सत्यजित भटकल कहते हैं, ''लगान ने आमिर और आशुतोष को भी बदला। ऐसा नहीं कहा जा सकता कि वे दोनों लगान के पहले से ऐसे थे। मनुष्य के तौर पर भी वे बदले। मैंने तो उन्हें महीने-दर-महीने बदलते देखा। आशुतोष और आमिर की दोस्ती और परस्पर विश्वास भी फिल्म की मजबूती की वजह बनी। दोस्ती और समझदारी के अलावा आमिर अच्छी तरह जानते थे कि डायरेक्टर को कैसे बड़ा किया जाता है। आशुतोष के समर्थन के लिए आमिर ने हर संभव कोशिश की। आमिर ने बहुत साफ तरीके से पूरी टीम को यह बात समझाई कि आशुतोष ही इस टीम के कप्तान हैं। दोनों के बीच इमोशनल कैमिस्ट्री थी। आमिर फिल्म के केवल निर्माता भर नहीं थे, आशुतोष के समर्थक भी थे।''
फिल्म मेकिंग में क्रांति
लगान ने फिल्म मेकिंग की कार्यप्रणाली में क्रांति का बिगुल फूंका। लगान के साथ भारतीय सिनेमा जगत में भी व्यवस्थित और सुनियोजित ढंग से फिल्म मेकिंग प्रारंभ हुई। हॉलीवुड की वर्किंग स्टाइल अपनाते हुए 'मूवी मैजिक' तकनीक का इस्तेमाल किया गया। विश्वसनीयता पर भी विशेष ध्यान दिया गया। पहले हिंदी फिल्मों में विदेशी कलाकारों की जरूरत होने पर देश में रहने वाले गोरी चमड़ी के लोगों को मौका दिया जाता था, वहीं आमिर और आशुतोष ने इंग्लैंड जाकर विदेशी कलाकारों का चयन किया। फिल्म मेकिंग में टीम भावना की आवश्यकता को भी आशुतोष और आमिर ने समझा। आशुतोष कहते हैं, ''लगान का श्रेय पूरी टीम को है। यह एक व्यक्ति की फिल्म नहीं है। लगान टीम वर्क का उदाहरण है। लगान के साथ सबसे अच्छी बात हुई है कि नई पीढ़ी भी इसे पसंद कर रही है!''
मेनस्ट्रीम हुआ पैरेलल सिनेमा
आशुतोष गोवारीकर जब लगान की शूटिंग कर रहे थे तभी उन्हें अहसास हो गया था कि वे कुछ विशिष्ट और विशेष बना रहे हैं। उन्हें लगान के ऐतिहासिक महत्व की अनुभूति हो गई थी। आशुतोष कहते हैं, ''1 जनवरी, 2000 को हम लोग लगान की शूटिंग के लिए भुज पहुंचे थे। 6 जनवरी को शूटिंग आरंभ की। दर्शक भी सदी के बदलाव की उमंग में थे। वे किसी भी परिवर्तन के लिए तैयार थे। लगान के बाद पैरेलल सिनेमा मेनस्ट्रीम हो गया। लगान के पहले आप नहीं सोच सकते थे कि नो वन किल्ड जेसिका जैसी फिल्म थिएटर में लग सकती है!''
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गाँव से फिर जुड़ा सिनेमा-महेश भंट्ट
हिंदी सिनेमा उन दिनों पश्चिमी स्पेस में जगह बना रहा था। आदित्य चोपड़ा और करण जौहर के प्रभाव में यह सब हो रहा था। हिंदुस्तानी सिनेमा में हिंदुस्तान नहीं दिख रहा था। सारे किरदार भाषा तो हिंदुस्तानी बोल रहे थे, लेकिन पहनावा, लैंडस्केप, आर्किटेक्चर और हीरो के आसपास की सारी चीजें पश्चिमी या शहरी हो गई थीं। महबूब खान और बिमल राय ने जिस हिंदुस्तान को पर्दे पर रचा था, वह सिरे से गायब था। लगान ने दोबारा ग्रामीण भारत से हिंदी सिनेमा का रिश्ता जोड़ा। उपनिवेशिक युग के भारत को पर्दे पर क्रिएट किया गया। मिंट्टी से जुड़े धरती पुत्रों के नजरिए से एक कहानी कही गई। बहुत ही प्रशंसनीय प्रयास था। बॉक्स आफिस पर मिली कामयाबी से उसने यह धारणा तोड़ी कि केवल शहरी फिल्में चलती हैं। फिल्म का कथानक बहुत ही आकर्षक था। उन्होंने यह संकेत दे दिया था कि कैसे भारत में एक विदेशी खेल अपनी जड़ें जमाएगा। अब तो क्रिकेट भारत का खेल हो गया है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के लोग क्रिकेट को जिंदा रखने के लिए भारत आते हैं।
इन खूबियों के बावजूद मैं यह जरूरी नहीं मानता कि इसे ऑस्कर तक ले जाना सही बात थी। मेरी नजर में वहां लॉबिंग करना गैरजरूरी काम था। आमिर और उनकी टीम का ढेर सारा समय बर्बाद हुआ। अपने देश के दर्शकों ने तो उसे सराहा ही था, फिर वहां से सर्टिफिकेट लेने की क्या जरूरत थी। लगान के बाद अपनी फिल्मों को ऑस्कर भेजने और विदेश में प्रदर्शित करने के लिए उनकी पसंद-नापसंद के हिसाब से काट-छांट की जाने लगी। वहां से एक गलत शुरुआत हो गई। मुझे लगता है कि ऑस्कर एक मार्केटिंग इवेंट से ज्यादा कुछ भी नहीं है। ईरान और चीन जैसे देशों के फिल्म मेकर तो उनकी मुहर के लिए परेशान नहीं होते!
-अजय ब्रह्मात्मज/सौम्या अपराजिता/ रघुवेन्द्र सिंह

शादी के बाद काम नहीं करना चाहती थी-पदमिनी कोल्हापुरे


अपने बेटे अभिनय के कहने पर पदमिनी कोल्हापुरे अभिनय की दुनिया में लौट आई। पिछले साल उनकी फिल्म बोलो राम आई थी। अभी वे माई फिल्म की शूटिंग कर रही हैं। खास बात यह है कि फिल्म में पदमिनी सगी मौसी गायिका आशा भोंसले के साथ अभिनय कर रही हैं। कहां थी पदमिनी? आज की फिल्मों से वे कितना इत्तेफाक रखती हैं? क्या उनका बेटा फिल्मों में आएगा? बता रही हैं पदमिनी इस मुलाकात में.....।

थक गई थी : मैं शादी के बाद काम नहीं करना चाहती थी। मैं थक चुकी थी। जीवन में एक वक्त आता है जब आप आराम करना चाहते हैं। महाराष्ट्रियन फैमिली में पले-बढ़े होने के नाते मैं शादी के बाद हमेशा से परिवार संभालना चाहती थी। मेरा बेटा बड़ा हो गया, तो मैं घर में बोर होने लगी। बेटे ने मुझसे एक दिन कहा कि आप इतनी अच्छी ऐक्ट्रेस हैं। आपको फिर से काम करना चाहिए। मैंने कहा कि फिर मुझे दिन भर घर से बाहर रहना पड़ेगा। उसने कहा कि जब मुझे आपकी ज्यादा जरूरत थी, तब आप मेरे पास थे। फिर मैंने फिल्मों में काम करने के बारे में सोचना शुरू किया।
नहीं करूंगी सीरियल: मेरे पास सीरियल के ऑफर आते हैं, लेकिन मुझे सीरियल वालों का हड़बड़ी में काम करना अच्छा नहीं लगता। वे आज ऑफर लेकर आते हैं और कहते हैं कि तीन दिन बाद शूटिंग शुरू होगी। महीने में पच्चीस दिन वे शूटिंग करते हैं। मुझे उनके काम करने का स्टाइल समझ में नहीं आता। मुझे तैयारी के लिए वक्त चाहिए होता है। मैं परफेक्शनिस्ट हूं। अगर मैं भिंडी की सब्जी बनाती हूं, तो उसे भी परफेक्ट बनाने की कोशिश करती हूं। क्योंकि सास भी कभी बहू थी सीरियल से स्मृति ईरानी के निकलने के बाद तुलसी के रोल के लिए मुझसे भी संपर्क किया गया था।
गर्व है काम पर: मैंने फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज लोगों के साथ काम किया है। मैंने लता मंगेशकर के साथ गीत गाया, दिलीप कुमार और नूतन के साथ एक्टिंग की, वी शांताराम के निर्देशन में काम किया। मैंने याद रखने योग्य रोल किए हैं। आहिस्ता आहिस्ता, प्रेम रोग, वो सात दिन, प्यार झुकता नहीं जैसी फिल्में कीं। मैं अपने दौर से बहुत खुश हूं। हमारे जमाने में फिल्में सिल्वर जुबली होती थीं। मैं अपने काम से बहुत खुश हूं पर मुझे अभी तक अपने बेस्ट रोल का इंतजार है।
बहुत इमोशनल है माई : फिल्म माई को लेकर मैं बहुत उत्साहित हूं। उसका बड़ा कारण है कि इसमें आशा जी एक्टिंग कर रही हैं। इसकी कहानी बहुत अच्छी है। मेरा रोल भी बहुत अच्छा है। मैं इस फिल्म में आशा जी की बेटी का रोल कर रही हूं। फिल्म का सब्जेक्ट बहुत इमोशनल है, लेकिन पुरानी फिल्मों की तरह ज्यादा मेलो ड्रामा नहीं है। इसमें एक संदेश भी है जिसका खुलासा मैं अभी नहीं कर सकती। यह फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है।
पढ़ाई छूटने का दुख : मैं सात साल की थी। आशा ताई मेरे घर आती थीं। वे कहती थीं किचल नाच के दिखा। ठीक वैसे ही जैसे गब्बर सिंह शोले में हेमा जी से कहता है। मैं वैसे ही नाचती थी। आशा ताई कहती थीं कि मैं तुझे फिल्मों में लाऊंगी। इश्क इश्क इश्क फिल्म के के गीत की रिकॉर्डिग के दौरान आशा ताई ने मुझे देव अंकल से मिलवाया। उन्होंने मुझसे पूछा कि फिल्म में काम करोगी। मैंने हां कहा। इश्क इश्क इश्क नहीं चली, लेकिन उसका अनुभव खूबसूरत रहा। मैं स्कूल को एंज्वॉय नहीं कर सकी, क्योंकि काम करने लगी थी। मुझे एजुकेशन कंप्लीट नहीं करने का दुख है।
फिल्मों में आएगा बेटा : मेरे बेटे ने जबसे होश सम्भाला है, उसे ऐक्टर बनना है। वह बाईस साल का हो गया है। आजकल वह अपने आपको ग्रूम कर रहा है। वह न्यूयॉर्क फिल्म एकेडमी से एक्टिंग की ट्रेनिंग लेकर लौटा है। अब वह डिक्शन, सिंगिंग आदि की ट्रेनिंग ले रहा है। ब्रदर इन लॉ के प्रोडक्शन हाउस में वह असिस्टेंट का काम भी कर रहा है। आजकल के लड़के और लड़कियां बहुत प्रोफेशनल हैं। उन्हें पता है कि क्या चाहिए और उसे पाने के लिए उन्हें क्या करना है?
-रघुवेंद्र सिंह 

Saturday, June 11, 2011

गुदड़ी में लाल होते हैं- धर्र्मेद्र


कलर्स के लोकप्रिय रियलिटी शो इंडियाज गॉट टैलेंट सीजन ३ में पहली बार धर्मेन्द्र बतौर जज आ रहे हैं. टीवी से धर्र्मेद्र का खास लगाव है। उन्होंने तय किया है कि 'इंडियाज गॉट टैलेंट' के प्रतिभाशाली लड़के-लड़कियों को वह अपने होम प्रोडक्शन की फिल्मों में मौका देंगे। जुहू स्थित अपने बगले में धर्मेद्र ने विशेष बातचीत में हमसे बाटी अपने दिल की बात :

टीवी पर आने में आपने इतना वक्त क्यों लगाया?
हर चीज का वक्त होता है। छोटे स्क्रीन का आजकल खूब चर्चा है। जो चीजें हमें बिग स्क्रीन पर नहीं देखने को मिलती, वह छोटे स्क्रीन पर देखने को मिल जाती हैं। टीवी पर आना अच्छा है।
आपने टीवी देखना कबसे शुरू किया?
जब टीवी आया था तब ब्लैक एंड व्हाइट था। तब टीवी पर खास कर गाने आते थे। चित्रहार वगैरह। गाव के सब लोग आकर बैठ जाते थे। बड़ा अट्रैक्शन था। मैं सोचता था कि यार ये कलर कब होगा? एक्साइटमेंट थी मन में।
टीवी पर क्या देखना पसद करते हैं?
मैं रेग्युलर टीवी नहीं देखता। मैं दिलीप साब और राज कपूर की पुरानी पिक्चरें ढूंढ़ता हूं। पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। आज अच्छे प्रोग्राम आ रहे हैं। जैसे 'कौन बनेगा करोड़पति'। सलमान ने जो किया था वह भी अच्छा था। आज बहुत लोगों को मौके मिल रहे हैं। आपको टीवी से तालीम मिल सकती है।
क्या मानें कि फिल्म वाले फिल्म के प्रचार के लिए टीवी का इस्तेमाल करते हैं और टीवी वाले फिल्म स्टार का फायदा उठाते हैं अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए?
गिव एंड टेक है। हमारे समय में इंडस्ट्री को बहुत ढक कर रखते थे। स्टार कैसे रहते हैं? कैसे खाते हैं? उसका अलग ही चार्म था, लेकिन आज उसका उलट हो गया है। उसके लिए मैंने लिखा था कि 'चल रहे हो तो बताने की जरूरत नहीं, रूक गए जिस दिन पूछेगा कोई नहीं, जानते हैं जो ढोल को पीटते नहीं, चलते रहते हैं बस मुड़कर देखते नहीं'। अब हम 'मुनादी वाला' हो गए हैं। पहले मैं थोड़ा असहज था, लेकिन वक्त के साथ बदलना पड़ता है। अगर वक्त के साथ नहीं बदले तो पीछे छूट जाएंगे।
'इंडियाज गॉट टैलेंट' शो का अनुभव कैसा रहा?
आपको याद नहीं होगा कि मैं एक समय कंटेस्टेंट रह चुका हूं। अप्रैल 1958 की बात है। बिमल राय और गुरुदत्त ने एक काटेस्ट आयोजित किया था। वह फिल्मफेयर का था। मैंने फार्म भर के भेज दिया। हमारे जमाने में एक्टर बनना एक ख्वाब था। अगर मुझे काटेस्ट में नहीं बुलाया जाता, तो आज गाव में कुछ कर रहा होता। उस काटेस्ट की वजह से आज धर्मेद्र हीरो बना है।
क्या आज के लोगों को आपके जमाने की तुलना में ज्यादा मौके मिल रहे हैं?
अब तो मौके ही मौके हैं। कहा मौके नहीं हैं? हर चैनल पर मौके मिल रहे हैं। जिसमें टैलेंट है, उसे मौका मिल रहा है। आज के लोग बहुत लकी हैं। अगर उनमें टैलेंट है, तो वे किसी भी मुकाम पर पहुंच सकते हैं।
स्माल टाउन से ज्यादा जोश के साथ लड़के-लड़किया आ रहे हैं?
कहते हैं न कि गुदड़ी में लाल होते हैं। उनका अपना रंग और रूप होता है। गुदड़ी से तो हम निकल कर आए हैं।
अब तो आप मुंबई के है। क्या गाव वालों से अब भी लगाव रहता है?
हा, मैं गेट से बाहर निकलता हूं, लोगों को गले से लगा लेता हूं। मैं तो कहता हूं कि कोई मुस्कुरा देता है तो मैं हाथ बढ़ा देता हूं, कोई हाथ बढ़ा देता है तो मैं सीने से लगा लेता हूं, कोई सीने से लगा लेता है तो मैं दिल में बसा लेता हूं।
क्या कंटेस्टेंट को आप मौका देंगे?
जरूर मौका देंगे। हम नए टैलेंट की तलाश कर रहे हैं। हम प्रोडक्शन में हैं तो अपनी फिल्मों में चास देना पसद करेंगे। मैं चाहूंगा कि कंटेस्टेंट कामयाब हों।
-अजय ब्रह्मंात्मज /रघुवेन्द्र सिह

Thursday, June 9, 2011

सेफ गेम नहीं खेल रही हूं-असिन


गजनी के बाद अब 'रेडी' के रूप में असिन के हिस्से एक और बड़ी सफल फिल्म जरूर आ गई है, लेकिन हिंदी फिल्मों में दमदार अभिनेत्री की पहचान के लिए अभी तक उनका संघर्ष जारी है। उन्हें औसत दर्जे की अभिनेत्री माना जा रहा है। असिन कहती हैं, 'तीन फिल्मों के आधार पर मुझे जज करना बहुत जल्दबाजी होगी। अभी तो मैंने कॅरियर शुरू किया है।'

असिन ने अब तक जिन हिंदी फिल्मों में काम किया है, वे उनके नाम से नहीं बल्कि उनके नायक रहे स्टार कलाकारों के नाम से याद की जाती हैं। 'गजनी' का जिक्र होते ही आमिर खान, 'लंदन ड्रीम्स' से अजय देवगन और 'रेडी' से सलमान खान की छवि दर्शकों के जेहन में बैठ चुकी है। असिन इन फिल्मों का हिस्सा भर मानी जाती हैं। असिन तर्क देती हैं, 'हमारे यहां कमर्शियल सिनेमा मेल ओरिएंटेड है। साउथ की फिल्म इंडस्ट्री में भी ऐसा ही है। मैं अभी ऐसी फिल्में स्वीकार कर रही हूं, क्योंकि मैं दर्शकों के बड़े समूह तक पहुंचना चाहती हूं। दूसरी अभिनेत्रियों की तरह मैं भी फीमेल ओरिएंटेड फिल्में करना चाहती हूं। जिस दिन मेरी पोजीशन हिंदी फिल्मों में स्ट्रांग हो जाएगी, उस दिन मैं वैसी फिल्में जरूर करूंगी।'
असिन की अगली फिल्म अक्षय कुमार के साथ 'हाउसफुल 2' होगी। असिन कहती हैं, 'मैं सेफ गेम नहीं खेल रही हूं। यदि फिल्म में स्टार होता है, तो उसकी सफलता और असफलता का क्रेडिट उसे दिया जाता है, लेकिन यह भी सच है कि फिल्म की असफलता और सफलता का असर फिल्म से जुड़े दूसरे लोगों पर भी पड़ता है।'
-रघुवेन्द्र सिंह

होश उड़ा देगी शैतान/शैतान में नए लुक में रजत बरमेचा


अनुराग कश्यप की 'उड़ान' कांस तक पहुंची थी। उनकी दूसरी फिल्म 'दैट गर्ल इन येलो बूट्स' विभिन्न फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई जा चुकी है। भारत में उसके रिलीज होने के पहले ही आ रही बतौर निर्माता अनुराग की पहली फिल्म 'शैतान':-

'शैतान' बनाने का विचार कहां से आया?
'शैतान' के निर्देशक विजय कल्कि से मिलने मेरे घर आया करते थे। कल्कि ने मुझे इस फिल्म के बारे में बताया था। फिर एक दिन पता चला कि निर्देशक बिजॉय नांबियार के प्रोड्यूसर ने हाथ खड़े कर दिए। मुझे फिल्म की स्क्रिप्ट बहुत अच्छी लगी थी, इसलिए मैं पैसे लगाने को तैयार हो गया। मैंने बिजॉय को पहले ही बता दिया था कि मेरी फिल्म बड़े पैमाने की नहीं होगी। मैं बिग बजट फिल्म बनाने की स्थिति में नहीं हूं।
आपके इर्द-गिर्द ढेर सारे युवा फिल्मकार दिखाई पड़ते हैं। क्या सभी को ऐसे ही मौके देंगे?
उनसे मुझे एनर्जी मिलती है। उनकी फिल्में देख कर और उनकी स्क्रिप्ट पढ़ कर मैं नई चीजें सीखता हूं। मेरी कोशिश रहती है कि युवा टैलेंट को सही मौके मिलें। अफसोस है कि इंडस्ट्री उन्हें समय पर तवज्जो नहीं देती। मेरी अपनी सीमाएं हैं। अगर मेरे पास पैसे हों तो मैं सभी की फिल्में प्रोड्यूस कर दूं। वैसे अब सभी बड़े बैनर यूथ फिल्में प्रोड्यूस कर रहे हैं।
क्या वजह है कि आप को डार्क या इटेंस थ्रिलर ही पसंद हैं?
हमारा मेनस्ट्रीम सिनेमा सपने और आकांक्षाओं के दम पर चलता है। उससे मुझे कोई गुरेज नहीं है। मैं अपने ढंग के सिनेमा के लिए थोड़ी सी जगह चाहता हूं। वैसे आप जिसे डार्क और इंटेंस कह रहे हैं, उन फिल्मों को भी विदेशी क्रिटिक हल्की-फुल्की फिल्म कहते हैं। मैं ऐसी फिल्में पसंद करता हूं, क्योंकि इनमें सच नुकीला और धारदार होता है। ट्रेडिशनल दर्शकों को यह सच चुभता है तो मैं क्या करूं?
आपने अभी यूपी, बिहार और झारखंड में एक फिल्म की शूटिंग की?
एक नहीं, दो फिल्मों की शूटिंग की। हमारी फिल्मों से देश गायब हो गया है। मैं 'शैतान' में शहरी युवकों को दिखा रहा हूं, तो मेरी 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में आप धुर देहात देखेंगे। मेरी फिल्मों के लिए विदेशी लोकेशन और चमक-दमक की जरूरत नहीं पड़ती। कहानी कहने का ढंग रोचक होना चाहिए। अच्छी कहानी को विजुअल की बैसाखी की जरूरत नहंी पड़ती।
-अजय ब्रह्मात्मज
                                                            शैतान में नए लुक में रजत बरमेचा

फिल्म इंडस्ट्री की हाट प्रापर्टी हैं रजत बरमेचा. उडान के बाद वे कल प्रदर्शित हो रही अनुराग कश्यप निर्मित शैतान में दर्शकों के बीच दोबारा आ रहे हैं. 'शैतान' में रजत बरमेचा एक अलग अंदाज में नजर आएंगे। रजत कहते हैं, 'शैतान' में मैं मेहमान भूमिका में हूं। 'उड़ान' में मैंने एक गुड बॉय रोहन का किरदार किया था। इसमें मैंने निगेटिव भूमिका निभाई है व मेरा लुक भी अलग है। मैंने आंखों में पियरसिंग रिंग लगाई है। दर्शक मुझे देखकर चौंक जाएंगे। यह मैडनेस की कहानी है। मैंने बिजॉय के साथ सिर्फ एक दिन शूटिंग की। उनके साथ काम करने में मजा आया।'
-रघुवेंद्र सिंह 

Wednesday, June 8, 2011

अब इमरान खान को मामी का सपोर्ट


मामा आमिर खान के बाद अब इमरान खान को उनकी मामी किरण राव का सपोर्ट मिल गया है. किरण राव ने देल्ही बेल्ही फिल्म के एक गीत स्वीटी तेरा प्यार चईदा का वीडियो अल्बम डायरेक्ट किया है. जिसमें  इमरान खान पहली बार हिप-हाप डान्स करते नज़र आयेंगे. 

-रघुवेंद्र सिंह 

Tuesday, June 7, 2011

सीआईडी की टीम के साथ लता मंगेशकर






सोनी चैनल के लोकप्रिय सीरियल सीआईडी की टीम लता मंगेशकर के घर पहुंची तो उनका यह बाल सुलभ मासूम रुप देखने को मिला. पिस्तौल के साथ कुछ मन लुभावन मुद्राओं में लता मंगेशकर. 
-रघुवेंद्र सिंह 

Monday, June 6, 2011

गुरु बैरी जान के साथ शाहरुख खान

                  अपने एक्टिंग गुरु बैरी जान के साथ शाहरुख खान की खास तस्वीर. 

आमिर खान की 'धुआं'


आमिर खान की अगली फिल्म का नाम होगा 'धुआं'. रीमा कागती निर्देशित इस थ्रिलर फिल्म में आमिर खान एक पुलिस अफसर की भूमिका निभा रहे हैं. 'धुआं' में आमिर खान के साथ रानी मुखर्जी और करीना कपूर हैं. फिल्म के एक विशेष दृश्य में आमिर खान. 
-रघुवेंद्र सिंह 

न्यू एंग्री यंग मैन


हिंदी फिल्मों के नए एंग्री यंग मैन कहला रहे हैं सोनू सूद। पुरी जगन्नाथ की फिल्म बुढ्डा.. होगा तेरा बाप में सोनू अंडरव‌र्ल्ड के लोगों का सफाया करने वाले पुलिस अफसर करण मल्होत्रा का किरदार निभा रहे हैं। खास बात यह है कि इस फिल्म में सोनू को हिंदी सिनेमा के पहले एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन का साथ मिला है। उनके लिए यह उपलब्धि है। वे खुशी जाहिर करते हैं, अमिताभ बच्चन के साथ काम करना मेरा ड्रीम था। वह ड्रीम इस फिल्म में पूरा हो गया। सोनू आगे कहते हैं, बच्चन फैमिली से मेरा कोई न कोई नाता जरूर है। अभिषेक बच्चन के साथ मैंने युवा और ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ जोधा अकबर में काम किया था और अब अमिताभ बच्चन के साथ बुढ्डा.. होगा तेरा बाप में काम करने का अवसर मिला।

फिल्म बुढ्डा.. होगा तेरा बाप में सोनू ने अमिताभ बच्चन के बेटे की भूमिका निभाई है। सोनू कहते हैं, बच्चन साहब ने जंजीर में जो काम किया था, वही इस फिल्म में करण करता है। करण के किरदार में एंग्री यंग मैन का टच है। जंजीर में अमित जी और प्राण साहब के बीच जेल के सीन जैसा ही एक दृश्य इसमें मेरे और अमित जी के बीच है। उसमें मैं बच्चन साहब के सामने ऊंची आवाज में बात कर रहा हूं। बच्चन साहब के सामने ऊंची आवाज में बात करना मेरे लिए बहुत बड़ी चुनौती थी।
अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका पाकर सोनू बेहद खुश हैं। वे कहते हैं, अमित जी सेट पर बेहद अनुशासित और काम के प्रति समर्पित रहते हैं। काम को लेकर वे हमेशा उत्साहित रहते हैं। अब मुझे समझ में आ गया है कि वे इस मुकाम पर क्यों हैं? बुढ्डा.. की शूटिंग के दौरान मुझे उन्हें करीब से जानने का मौका मिला। उनसे मुझे सीखने को भी बहुत मिला। सोनू आगे कहते हैं, अमितजी, काम के प्रति मेरा डेडीकेशन देखकर बहुत खुश हुए। वे मुझे प्रोत्साहित करते रहते थे। बुढ्डा.. होगा तेरा बाप फिल्म के बारे में सोनू कहते हैं, यह बहुत एंटरटेनिंग फिल्म है। इसमें ऐक्शन है और रोमांस भी। बुढ्डा.. होगा तेरा बाप फिल्म के बारे में प्रचारित किया जा रहा है कि इसमें अमिताभ बच्चन अपने एंग्री यंग मैन के पुराने अंदाज में लौट रहे हैं। प्रचार में उनकी पुरानी फिल्मों के लोकप्रिय संवादों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सोनू कहते हैं, उस प्रचार से यह न समझें कि फिल्म उस तरह की है। वह फिल्म का एक एंगल जरूर है, लेकिन फिल्म की कहानी बहुत अलग है। बुढ्डा.. होगा तेरा बाप के बाद सोनू की अगली फिल्म होगी रजनीकांत के साथ राणा और तब्बू के साथ मैक्सिमम।
-रघुवेंद्र सिंह 

राजनीति के शिकार रणबीर


रणबीर कपूर की तेज रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए फिल्म इंडस्ट्री में राजनीति शुरू हो चुकी है। 'राजनीति' फिल्म में प्रतिद्वंदियों को शिकस्त देने वाला यह युवा नायक क्या निजी जीवन में भी विजेता सिद्ध होगा?

¨हदी सिनेमा की फ‌र्स्ट फैमिली के लाडले रणबीर कपूर ने चार साल पूर्व जब बड़े पर्दे पर दस्तक दी, तो सारे हिंदुस्तान के मन में एक ही प्रश्न था कि क्या रणबीर अपने पूर्वजों की शानदार गौरवमयी अभिनय परंपरा को आगे बढ़ा पाएंगे? ऋषि और नीतू कपूर के इस दुलारे ने चार साल के छोटे से कॅरियर में अपने खानदान की गरिमा में चार चांद लगा दिए। अत्यंत कम समय में रणबीर कपूर ने बचना ऐ हसीनों, वेक अप सिड, अजब प्रेम की गजब कहानी और राजनीति जैसी अलग-अलग विधाओं की चार बड़ी सफल फिल्में दीं। बॉक्स ऑफिस पर औसत रही सांवरिया, रॉकेट सिंह सेल्समैन ऑफ द ईयर और अंजाना अंजानी फिल्मों में भी उनके काम की लोगों ने सराहना की।
देखते ही देखते रणबीर की लोकप्रियता भारत के छोटे कस्बों और गांवों तक में पहुंच गई। फलस्वरूप कंपनियां रणबीर कपूर को ब्रांड अंबेसडर बनाने की होड़ में लग गईं। फिल्मों के यूथ किंग रणबीर पेप्सिको, पैनॉसानिक इंडिया और निसान मोटर्स के ब्रांड अंबेसडर बनकर एड व‌र्ल्ड के भी किंग बन गए। हल्ला तब मच गया जब कई वर्ष तक ऋतिक रोशन को अपना ब्रांड अंबेसडर बनाए रखने वाली कंपनी जॉन प्लेयर्स ने ऋतिक की बजाए अपना अगला करार रणबीर कपूर के साथ कर लिया। रणबीर की कीमत ऋतिक रोशन जैसे शीर्ष कलाकारों के समकक्ष पहुंच गई।
रणबीर कपूर की लोकप्रियता और बाजार में तेजी से बढ़ती डिमांड उनके प्रतिद्वंदियों और शीर्ष अभिनेताओं की आंखों में चुभने लगी। फिर शुरू हो गई रणबीर की इमेज को धूमिल करने की राजनीति। उनकी स्पीड पर ब्रेक लगाने की राजनीति। कुछ समय से अलग-अलग लड़कियों से प्रेम संबंध को लेकर रणबीर कपूर का लगातार अखबारों और न्यूज चैनलों में आना इत्तेफाक भर नहीं है। कभी कट्रीना कैफ तो कभी नरगिस फाकरी तो कभी किसी अनाम चेहरे के साथ हर रोज रणबीर का नाम जोड़ा जा रहा है। रणबीर कपूर की इमेज एक अविश्वसनीय शख्स की बनाने की कोशिश की जा रही है। स्वयं रणबीर कपूर भी इस बात से वाकिफ हैं। हाल में उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि मेरे खिलाफ इस तरह की मुहिम बंद होनी चाहिए। रणबीर ने कहा, ''मैं हर दिन अखबार खोलता हूं तो किसी न किसी लड़की के साथ मेरे लिंकअप की खबर होती है। इससे मुझे और मेरे पैरेंट्स को दुख होता है।''
काबिले जिक्र है कि कुछ समय पूर्व तक यशराज फिल्म्स और धर्मा प्रोडक्शंस के प्रिय रहे रणबीर कपूर अब इन बैनरों की एक भी फिल्म में काम नहीं कर रहे हैं। इसके विपरीत यशराज फिल्म्स और धर्मा प्रोडक्शंस अब आमिर खान के भांजे इमरान खान पर फिदा हैं। यशराज फिल्म्स उन्हें लेकर कट्रीना कैफ के साथ मेरे ब्रदर की दुल्हन और आई हेट लव स्टोरीज के बाद करण जौहर दोबारा उनके साथ शार्ट टर्म शादी फिल्म बना रहे हैं।
दिलचस्प बात है कि किसी स्टार के साथ ही फिल्में बनाने वाले ये स्थापित बैनर नवोदित इमरान खान पर अपना पैसा क्यों लगा रहे हैं? यह बात अब रहस्य नहीं है कि इमरान खान को अपने मामा आमिर खान और मामा के अजीज दोस्त सलमान खान का कट्टर समर्थन हासिल है। इंडस्ट्री के जानकारों की मानें तो इस वक्त यशराज और करण जौहर के साथ आमिर और सलमान के संबंध बहुत अच्छे हैं। दोनों अपनी स्टार पॉवर का इस्तेमाल करके इमरान खान को रणबीर कपूर की टक्कर में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।
रणबीर कपूर और इमरान खान की गहरी दोस्ती टूटने का कारण भी यही है। फिलहाल वे अपनी काबिलियत के दम पर अकेले आगे बढ़ रहे हैं। इन दिनों वे जिन फिल्मों में काम कर रहे हैं, वे किसी फिल्मी घराने की फिल्में नहीं हैं। देखते हैं कि रणबीर कपूर फिल्म इंडस्ट्री की खेमों की राजनीति का सामना कैसे करते हैं। कैसे वे अपनी लोकप्रियता और प्रतिष्ठा को बरकरार रखते हुए अपने खानदान की आन, बान और शान की सुरक्षा करते हैं!
-रघुवेंद्र सिंह 

Saturday, June 4, 2011

मनोरंजन से भरपूर रेडी-फिल्म समीक्षा

वांटेड  और दबंग  जैसे सिनेमा की अगली  कड़ी है रेडी। अब सलमान खान से किसी बौद्धिक फिल्म की अपेक्षा करना गलत होगा। हिंदी फिल्मों के पारंपरिक दर्शकों को ध्यान में रखकर मसाले से भरपूर यह फार्मूला फिल्म बनाई गई है। रेडी में सिचुएशनल  कॉमेडी है, नायक-नायिका का गीतों से सजा रोमांस है, नायक-खलनायक की मारधाड़ है और साथ में परंपराओं का खंडन एवं कटुता को परे रखकर प्रेमभाव से रहने का संदेश है। यह अनीस बज्मी  की नहीं, पूरी तरह से सलमान खान की फिल्म है।

रेडी का नायक है प्रेम। वह बैंकॉक के एक अमीर भारतीय परिवार का लाडला है। उसके पिता और दोनों चाचा चाहते हैं कि प्रेम की जल्द से शादी हो जाए ताकि वह जिम्मेदार बन जाए। पंडित जी की सलाह पर प्रेम की शादी पूजा से करने का विचार किया जाता है। प्रेम और चाचा एयरपोर्ट पर पूजा को लेने जाते हैं। प्रेम को बाद में पता चलता है कि उसके घर में आई लड़की पूजा नहीं, संजना  है। संजना  अपने दोनों डॉन  मामाओं  से भाग रही है। वे उसके दो सौ करोड़ रूपए के लिए जबरन उसकी शादी कराना चाहते हैं। प्रेम संजना  की मदद करता है। अपनी पत्नी में खुर्राट, कमीनी और होनहार जैसी खूबियां चाहने वाले प्रेम को संजना में यह सारी बातें मिलती हैं। संजना को हासिल करने के लिए प्रेम न सिर्फ संजना  के दोनों मामाओं  को सुधारता है बल्कि वह सगे भाइयों का मिलन भी करवाता है।
हिंदी फिल्मों में गालियां आम बात हो गई हैं। रेडी के नायक प्रेम का परिचय दिया गया है कि वह कुत्ता-कमीना है। प्रेम खुद भी स्वयं को मॉडर्न  जमाने का कुत्ता और अपनी गर्लफ्रेंड संजना  को कुतिया कहता है। सलीम खान जैसे मशहूर लेखक की निगरानी  में लिखी गई रेडी फिल्म का यह पक्ष दुख पहुंचाता है। अजीब बात है कि बैंकाक में रची-बसी रेडी के किरदार देसी हिंदी और गालियां तो देते ही हैं, वहां के स्थानीय डॉक्टर और बैंक का वॉचमैन  भी हिंदी बोलता है। फिल्म के लोकप्रिय हो चुके कैरेक्टर  ढीला और ढिंक-चिका  गीतों का फिल्म में म्यूजिक वीडियो के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। रेडी का नायक प्रेम क्लाइमेक्स की ओर बढ़ते-बढ़ते अपने विरोधियों का दिल जीतकर परोक्ष रूप से आदर, सम्मान, प्रेम आदि का संदेश दे जाता है। रेडी सलमान खान के लिए लिखी गई फिल्म है। इसके हर फ्रेम में वे अपने स्टाइल में मौजूद हैं। संजना  के किरदार में असिन ने एक बार फिर अपने सहज अभिनय का परिचय दिया है। सहयोगी  भूमिकाओं में परेश रावल, महेश मांजरेकर, अखिलेंद्र मिश्रा, मनोज जोशी, आर्य बब्बर ने सधा अभिनय किया है। निकितन  धीर में हिंदी फिल्मों का एक दमदार युवा खलनायक महसूस किया जा सकता है। वांटेड  और दबंग  के प्रशंसकों को रेडी फिल्म जंचेगी।
रेटिंग- तीन स्टार
-रघुवेन्द्र सिंह

ढिंक चिका.. सलमान

अपनी अनोखी एक्टिंग स्टायल की तरह सलमान खान ने अब अपना डान्सिंग स्टायल भी ईजाद कर लिया है. उनके सहज, सरल और स्टाइलिश डान्स स्टेप दर्शकों के बीच अत्यन्त लोकप्रिय हो चुके हैं. सलमान अब डान्सिंग स्टार बन गए हैं.
                                       (रेडी के सेट पर सलमान खान निजी कोरियोग्राफर मुदस्सर खान के साथ )
अमूमन दूसरे फिल्म स्टार जहा माइकल जैक्सन जैसे डासिग आइकॉन की तरह डास करने के प्रयास में रहते हैं, वहीं सलमान खान को अपने प्रशसकों की फिक्र रहती है। सलमान खान के निजी कोरियोग्राफर मुदस्सर खान का यह अनुभव इस बात को साबित करता है। मुदस्सर 'रेडी' फिल्म के गीत ढिंक-चिका.. के लिए एक बेहद फास्ट स्टेप सलमान से करने के लिए कह रहे थे, लेकिन सलमान ने उनसे कहा कि आप जैसे लोग हिंदुस्तान में सिर्फ दस लाख हैं और मेरे जैसे लोग नब्बे करोड़ हैं। ऐसे डास स्टेप बताइए जिसे हिंदुस्तान का हर आदमी कर सके। स्वय सलमान खान कहते हैं, 'मेरा मानना है कि आप जितना सिपल, स्टाइलिश और गदा नाच सकते हो, नाचो ताकि हर आदमी उस स्टेप को अपना सके।'
काबिले जिक्र है कि सलमान खान अपने कोरियोग्राफर द्वारा निर्देशित स्टेप को हू-ब-हू करने की बजाए उसमें अपना विशेष पुट डाल देते हैं। मशहूर कोरियोग्राफर फराह खान कहती हैं, 'सलमान को डास स्टेप बताकर भूल जाना चाहिए। उनसे उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वह हमारे स्टेप को हू-ब-हू करेंगे। वह डास स्टेप में अपना स्टाइल जोड़कर उसे नया रूप दे देते हैं।' वहीं मुदस्सर खान अपना अनुभव बताते हैं, 'सलमान मुझसे स्टेप पूछते हैं और फिर उसे अपने स्टाइल में पेश करते हैं।' 
-रघुवेंद्र सिंह